// लाल किताब में सूर्य ग्रह का विस्तृत महत्व और उपाय

लाल किताब में सूर्य ग्रह का विस्तृत महत्व और उपाय

लाल किताब में सूर्य ग्रह का गहरा विश्लेषण

प्रस्तावना: जिस प्रकार वैदिक ज्योतिष में सूर्य को एक प्रमुख ग्रह माना गया है उसी प्रकार लाल किताब में भी सूर्य को उतना ही महत्व दिया गया है। पुराणों में सूर्य को देवता कहा गया है जो समस्त संसार की आत्मा है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, सूर्य महर्षि कश्यप और अदिति के पुत्र हैं। ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है और यह सिंह राशि का स्वामी है। मेष इसकी उच्च राशि है जबकि तुला राशि में यह नीच भाव में माना जाता है। वहीं चंद्रमा, मंगल और गुरु सूर्य के मित्र ग्रह हैं। जबकि शुक्र और शनि इसके शत्रु ग्रह माने जाते हैं।
खगोलीय एवं ज्योतिषीय प्रकृति
सूर्य अपने मित्र ग्रहों के साथ होता है तो यह जातकों को शुभ फल देता है। जबकि शत्रु ग्रहों के साथ इसके फल अच्छे नहीं होते हैं। ऐसा कहते हैं कि सूर्य के समीप आने पर किसी भी ग्रह का प्रभाव शून्य हो जाता है, इसलिए कई बार ऐसा होता है कि सू्र्य के प्रभाव में आने के कारण संबंधित ग्रह अपनी प्रकृति के अनुसार परिणाम नही दे पाते हैं। सूर्य गोचर के दौरान क़रीब एक महीने में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। इस कारण संपूर्ण राशि चक्र को पूरा करने में सूर्य 12 माह अर्थात एक वर्ष लगाता है। यह अन्य ग्रहों की तरह वक्री नहीं होता है।

लाल किताब का विशेष नियम: सूर्य को ब्रह्मांड का प्रकाश माना गया है, इसलिए इसके शुभ फल पाने तथा इसके बुरे प्रभाव से बचने के लिए बेल की जड़, माणिक्य रत्न अथवा एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने विधि ज्योतिष में बतायी गई है।
कारकत्व और शरीर पर प्रभाव
सूर्य को जातक की कुंडली में सम्मान, सफलता, प्रगति एवं सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र में उच्च सेवा का कारक माना जाता है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मा तथा पिता का कारक भी कहा गया है। सूर्य सभी ग्रहों का राजा होता है अर्थात यह नेतृत्व का प्रतीक है। पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत सूर्य ही है। इसलिए सूर्य को ऊर्जा का भी कारक माना जाता है। इसके अलावा सूर्य ग्रह आत्मा का कारक होता है।

शारीरिक संबंध: मनुष्य के शरीर में सूर्य उसके हृदय को दर्शाता है। साथ ही यह पुरुषों की दायीं आँख जबकि महिलाओं की बायीं आँख का प्रतिनिधित्व करता है। पीड़ित सूर्य के कारण जातकों को कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। अतः यह लो ब्लड प्रेशर, चेहरे पर मुहांसे, तेज़ बुखार, टाइफाइड, मिर्गी एवं पित्त, हृदय या हड्डी से संबंधित रोगों का कारक है।

सूर्य का प्रतीकात्मक संबंध और वस्तुएं

लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह का संबंध साक्षात भगवान विष्णु जी से है। शास्त्रों में वर्णित है कि सूर्य भगवान विष्णु के प्रतीक स्वरूप रथ पर सवार हैं। लाल किताब में सूर्य के अधिकार क्षेत्र में आने वाली वस्तुएं और जीव इस प्रकार हैं:

तांबा काली कपिला गाय इकलौता पुत्र सख़्त राजा बहादुर व नीतिवान क्षत्रिय व राजपूत माणिक पत्थर गेहूँ व बाजरा शिलाजीत भूरी भैंस
सूर्य के शुभ और अशुभ फल का विस्तृत विवरण
यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य बली हो तो जातक को इसके सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। वहीं यदि कुंडली में सूर्य पीड़ित हो तो जातक को इसके नकारात्मक प्रभाव झेलने पड़ते हैं। सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में बली होकर शुभ फल देता है, वहीं तुला (नीच राशि) में अशुभ फल देता है। चंद्रमा, मंगल और गुरु के साथ इसकी शक्ति बढ़ जाती है, जबकि शत्रु ग्रहों की संगति इसे हानिकारक बना देती है।

लाल किताब शांति उपाय व टोटके

लाल किताब के उपाय बहुत सरल और लाभकारी होते हैं, जिन्हें कोई भी व्यक्ति स्वयं कर सकता है:


  • आहार नियम: पति-पत्नी में से किसी एक को गुड़ के सेवन से परहेज करना चाहिए।
  • सिद्धांत: कभी भी किसी से मुफ्त की चीज़ न लें, अपना हक ही रखें।
  • मातृ सेवा: माँ का आशीर्वाद सदैव लें और नियमित चावल-दूध का दान करें।
  • मानवता: अंधे व्यक्ति की निःस्वार्थ भाव से सहायता करें।
  • आचरण: समाज और परिवार में सभी के साथ प्रेमपूर्ण और शालीन व्यवहार रखें।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ